लोक प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषा

लोक प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषा

सामान्यतः लोग कार्यपालिका को ही सरकार मानते और कहते है परन्तु यह सकीर्ण मान्यता है क्योकि सरकार रूपी संघटन के अन्तर्गत केवल कार्यपालिका ही नहीं अपितु उसके साथ साथ विधायक और न्यायपालिका भी आती है अर्थात तीनो का मिला हुआ रूप अथवा नाम सरकार है.

विधायका विधि एवं नियम निर्माण कार्यपालिका उन्हें लागु करने तथा न्यायपालिका उनकी व्यख्या करने का कार्य करती है. लोकतान्त्रिक व्यवस्था में शक्ति विभाजन के आधार पर तीनो अपने – अपने अधिकार में स्वतंत्र होती परन्तु तीनो में अटूट एवं अविच्छिन सम्बन्ध तथा उनके कार्यो के बीच समन्वय होता है विधि एवं नियम निर्माण , विधियों एवं नियमो के कार्यान्वयन तथा उसके औचित्य और अनौचित्य की व्याख्या के बिना राज्य के उद्देश्य की पूर्ति एवं उसके कार्यो का सम्पादन नहीं हो सकता है तीनो की अपनी – अपनी संघटनात्मक व्यवस्थाएं होती है. कार्यपालिका की संघटनात्मक व्यवस्था के अंतर्गत उसके अधीनस्थ उसके सहयोगी के रूप में सरकारी अधिकारियो एवं कर्मचारियों का एक वर्ग होता जिसे लोक – प्रशासन कहा जाता है.

ग्लेडन ने इस परिभाषा के सम्बन्ध में कहा है – कि लोक प्रशासन के बहुत से रूप है और इसकी परिभाषा करना अत्यंत कठिन है

विद्वानों द्वारा की गयी इसकी परिभाषा विवेचना से ऐसा प्रतीत होता है कि उनमे से कुछ ने व्यापक तथा कुछ ने संकीर्ण रूप से इसकी परिभाषा की है जहा कुछ थोड़े से विद्वानों ने इसे सरकार के तीनो अंग – विधायिका , कार्यपालिका और न्यायपालिका तो अधिकतर ने इसे केवल कार्यपालिका से सम्बद्ध कर इसकी परिभाषा की है कुछ भी हो इसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं हो पायी है कला के रूप में इसे लोकहित से सम्बंधित प्रशासनिक क्रिया और संघटन तथा विज्ञान के रूप में उस क्रिया के बारे में वैज्ञानिक पद्धति से अध्धयन करने वाले एक सामाजिक विज्ञान कहा गया है.

विद्वानों की परिभाषाएँ-

  • साइमन ने सामान्य उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सहयोगात्मक रूप में की जाने वाली सामूहिक क्रियाओ को प्रशासन कहा है.
  • मार्क्स के अनुसार अर्थपूर्ण उद्देश्य की पूर्ति किया गया संकल्पित कार्य प्रशासन है उन्होंने इसे क्रिया के साथ – साथ संज्ञा के रूप में भी जो करना चाहते है उसे संपन्न करने के उद्देश्य से किये जाने वाले कार्यो की क्रमबद्ध व्यवस्था तथा साधनो का निश्चित प्रयोग प्रशासन है.
  • लूथर गुलिक ने निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्यो को संपन्न कराने को प्रशासन कहा है.
  • एल 0 डी 0 ह्वाइट ने भी क्रिया के रूप में इसे परिभाषा करते हुए व्यक्तियों के निर्देशन उनके बीच समन्वय तथा उनके नियंत्रण करने को प्रशासन कहा है.

लोक प्रशासन में पोस्टकार्ब का महत्व –

P = Planning = योजना बनाना – कार्य करने से पूर्व उसकी रुपरेखा का निर्धारण योजना है इसके अंतर्गत उन सभी बातों पर विचार होता जिनके द्वारा निर्धारित और निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति सरल होती है इसके अतिरिक्त उद्देश्य प्राप्ति के साधनो पर भी विचार होता है आज नियोजन की भूमिका विशेष रूप में महत्वपूर्ण है कार्य करने के पूर्व उसकी रुपरेखा का निर्धारण विषय के रूप में , योग्य तथा विशेषज्ञ लोग करते है.

O = Organization = संघटन – यह एक विभागीय व्यवस्था है जिसके द्वारा निश्चित उद्देश्यो की पूर्ति की जाती है इसके जरिये विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है प्रत्येक विभाग एक इकाई की तरह कार्य करता परन्तु सभी -एक दूसरे से सम्बद्ध होते है संघटन के बिना कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती है.

s =staffing = कर्मचारी वर्ग – लोकप्रशासन की सफल भूमिका कुशल लोक – सेवको पर निर्भर करती है उनकी नियुक्ति , पदोन्नति तथा उनके अभ्यास एवं चयन आदि के बारे में इस शास्त्र में अध्ययन होता है योग्य , कुशल और करने योग्य सेवीवर्ग के अभाव में कोई भी प्रशासन सफल नहीं हो सकता है.

d = direction = निर्देशन – लोकप्रशासन सेवक उसी समय दायित्वों का अपेछित रूप से निर्वहन कर सकता है. जब उसका सही ढंग से निर्देशन हो प्रशासन सम्बन्धी निर्णयों के अनुरूप ही कर्मचारियों को विशिष्ट या सामान्य आदेश देना उनका निर्देशन है.

Co =Co – Ordination = समन्वय – लोकप्रशासन में सभी इकाइयां अथवा व्यक्ति एक दूसरे पर आश्रित रहते अतः उनके कार्यो के बीच समन्वय आवश्यक है लोक प्रशासन की सफलता के लिए विभिन्न विभागों के बीच इसका होना जरुरी है.

r = reporting = प्रतिवेदन तैयार करना – लोक – प्रशासन अपने विभागों के प्रगति के बारे में विधायका को समय – समय पर सूचित करता रहता है ताकि जन – प्रतिनिधि प्रशासनकिय कार्यो के बारे में आश्वस्त हो सकें इसके लिए प्रतिवेदन तैयार कर उसे उसके सामने प्रस्तुत करता है.

b = budgetting = बजट तैयार करना – अर्थ के आभाव में कोई भी व्यवस्था चल नहीं सकती है लोक – प्रशासन के कार्यो के सफल निष्पादन के लिए धन की व्यवस्था की जाती है.

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