पदसोपान से आप क्या समझते है?What do you understand by hierarchy?

पदसोपान – प्रशासन का ढांचा किस प्रकार होता है , यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है इस ढांचे का निर्माण पदसोपान प्रणाली के आधार पर होता है यह संगठन में कार्यरत कर्मचारीयों के मध्य संगठन के कार्य एवं सत्ता का विभाजन के फलस्वरूप सत्ता पर आधारित एक ऐसे प्रशासनिक ढांचे का निर्माण होता है जिसमे उच्च अधिकारियों और निम्न अधिकारियों के बीच सम्बन्धो का विस्तार एक सोपानात्मक ढांचे में दर्शाया जाता है वास्तव , पदसोपान उच्च एवं अधीनस्थ कर्मचारियों के मध्य स्पष्ट विभेदो का ही नाम है

पदसोपान का अर्थ (meaning of hierarchy )-

पदसोपान का शाब्दिक अर्थ है “श्रेणीबद्ध प्रशासन ” | अंग्रेजी में इसे हायरार्की कहते है जिसका मतलब है ” निम्नतर पर उच्चतर का शासन अथवा नियंत्रण | इस अर्थ में प्रत्येक उच्च अधिकारी अपने तात्कालिक अधीनस्थ कर्मचारी को आज्ञा देता है अधीनस्थ अधिकारी उन आज्ञाओ का पालन करते है अर्थात पदसोपान एक ऐसे संगठन का परिचायक होता है जो पदों के एक उत्तरोतर क्रम के अनुसार सोपान अथवा सीढ़ी की भाँति संगठित किया जाये | पदसोपान का अर्थ है क्रमिक संगठन जिसमे निम्नस्तरीय व्यक्ति उच्चस्तरीय व्यक्ति अथवा पदाधिकारी के प्रति उत्तरदायी रहते है यही क्रम ऊपर से नीचे तक और नीचे से ऊपर की ओर चलता है

एल 0 डी 0 व्हाइट के अनुसार

” पदसोपान संगठन के ढांचे में ऊपर से लेकर नीचे तक उतरदायित्व के अनेक सोपानो द्वारा उच्च व्यक्तियों का श्रेणीबद्ध रूप में एक व्यवस्थित संगठन है “

अर्ल लाथम के अनुसार

” पदसोपान निम्न तथा उच्च व्यक्तियों का श्रेणीबद्ध रूप में एक व्यवस्थित संगठन है “

पदसोपान प्रणाली की व्याख्या –

पदसोपान की तुलना ” पिरैमिड ” से की जा सकती है इसमें शिखर पर एक प्रधान प्रशासनिक अधिकारी होता है तथा सत्ता क्रमिक रूप से नीचे की ओर बढ़ती है

हमारे देश में राज्यों के पुलिस संगठन में पदसोपान की रचना को निम्नलिखित ढंग से दर्शाया जा सकता है –

  • पुलिस महानिदेशक
  • पुलिस महाधिपति
  • पुलिस उपमहाधिपति
  • जिला पुलिस superintendent
  • उप / सहायक पुलिस superintendent
  • मण्डल inspector
  • inspector / sub inspector
  • हेड कांस्टेबल (सिपाही )
  • कांस्टेबल ( सिपाही )

इस प्रकार पुलिस प्रशासन में पदसोपान ऊपर से नीचे तक इस तरह होता है

पदसोपान प्रणाली की विशेषताए –

ऐसा संघटन पिरीमिडाकार होता है इसके शीर्ष पर एक शीर्षस्थ पदाधिकारी होता है वह सब प्रकार की सर्वोच्च सत्ता रखता है

पुरे प्रशासनिक क्रियाकलाप को इकाइयों और उपइकाइयो में विभाजित कर दिया जाता है

इसमें सत्ता ऊपर से नीचे को हस्तानांतरित होती है संगठन की समस्त सत्ता अंतिम रूप में सर्वोच्च पदस्थ व्यक्ति में निहित होती है यह अपने से निम्नपदस्थ को उसे पूरा का पूरा अथवा कुछ मात्रा में हस्तानांतरित करता और इस प्रकार वह क्रमिकरूप में अन्य निम्न स्तरों को हस्तानांतरित होती जाती है

संघटन में सभी स्तर अथवा इकाइयों एक – दूसरे से अविच्छिन्न रूप में जुड़ी होती है इसका रूप कड़ी की तरह होता है

पदसोपानीय व्यवस्था आदेश की एकता के सिद्धान्त पर आधारित होती अर्थात संघटन में व्यक्ति अपने से ठीक ऊपर के अधिकारी अथवा पदाधिकारी के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य होता है

  • इससे संघटन में विभिन्न स्तरों पर कार्यो में तालमेल होता है.
  • संघटन में विभिन्न स्तरों पर कार्यो में तालमेल होता है.

संघटन में सभी कार्य उचित माध्यम से होते है अर्थात कोई भी कार्य उसी स्तर के माध्यम से किया जाता जो उसे करने के लिए अधिकृत होता है.

आदेश की एकता सिद्धांत का पालन – इस सिद्धांत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण यह है की इसमें आदेश की एकता के सिद्धांत को अपनाया जाता है प्रत्येक व्यक्ति को इस बात की जानकारी रहती है की उसका तत्कालीन उच्च अधिकारी कौन है जिसकी आज्ञा का उसे पालन करना है. प्रत्येक कर्मचारी केवल एक ही व्यक्ति के आधीन रहकर कार्य करता है और उसी के प्रति उत्तरदायी रहता है इससे संगठन का कार्य सुचारु रूप से चलता है.

नेतृत्व का निर्धारण – संगठन को पदसोपान द्वारा भिन्न – भिन्न स्तरों में विभाजित करके यह निश्चित कर दिया जाता है की कौन किसका नेतृत्व करेगा तथा निर्णयों के लिए कौन उत्तरदायी होगा

समग्रीकरण – पदसोपान से संगठन की इकाइयां परस्पर एकीकृत और सुसम्बद्ध रहती है.

उचित मार्ग द्वारा -कार्य इसके द्वारा प्रशासन और कार्यालयीन पद्धति के महत्वपूर्ण सिद्धांत उचित मार्ग द्वारा का विकास हुआ है इस पद्धति में प्रत्येक मामला हर स्टार में से गुजरता हुआ ऊपर तक पहुँचता है इसका बड़ा लाभ यह है की इससे उच्च अधिकारियों के बहुमूल्य समय की बड़ी बचत होती है.उत्तरदायित्व का प्रत्यायोजन – इस प्रक्रिया द्वारा उच्च अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारीयों को कुछ अपनी शक्तिया हस्तानांतरित अथवा प्रत्यायोजित कर देता है इसे सत्ता का प्रत्यायोजन कहते है इसमें सत्ता का विकेन्द्रीकरण हो जाता है वह अधिक व्यवस्थितपूर्वक अपने सगठन का संचालन कर सकता है

प्रशासन में सूचना माध्यम का कार्य – इसके अंतर्गत प्रशासन के संगठन के विभिन्न सोपान सूचना माध्यम के रूप में कार्य करते है इसके द्वारा ऊपर से नीचे तथा नीचे से ऊपर की ओर संचार का मार्ग प्रशस्त किया जाता है की उसको अपने कार्यो में किस प्रकार आगे बढ़ना चाहिए

समन्वय – यह सिद्धांत समूचे विभाग की कार्यवाहियों में समन्वय स्थापित करने में सफल होता है चूकि सत्ता के अंतिम सूत्र शिखर के अधिकारी के पास रहते है इसलिए वह विभाग की विभिन्न शाखाओ की गतिविधिया में तालमेल बैठा सकता है

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